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प्रत्येक जीव (मनुष्य) हमेशा स्वयं के द्रष्टिकोण (नजरिये) में हमेशा स्वयं को सही ही पाता है,
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इसलिये आवश्यक है, दूसरों के द्रष्टिकोण से स्वयं को देखना…
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“स्वयं की गलतियों को जानने और मानने वाला ही ज्ञानी है”

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यहाँ : आज का अलट्रा मोडर्न ज्ञान

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English font :
Pratyek Manushya hamesa svayam ke drashtikon mein hamesa swayam ko sahi hi pata hai,
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Isliye Avshyak hai, Dusro ke Drashtikon se swayam ko dekhna…
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“Swayam ki Galatiyon ko Janane aur Manne wala hi Gyani hai”

यहाँ : Whatsapp Faltu Gyan ki Batein

1 COMMENT

  1. दृष्टिकोण शुद्ध बने जब ,
    स्थितियां सब अनुकूल बनें ।
    कूल बनें चंचल लहरें भी,
    तीक्ष्ण शूल भी फूल बनें ।।

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